Beim Lesen von Schillers Glocke vor Lachen fast vom Stuhl gefallen : oder ; die Schwierigkeiten der Zeitgenossen mit den Zeitgenossen
में प्रकाशित: | Kunstforum 80(1985)3, S. 199-203 |
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मुख्य लेखक: | |
स्वरूप: | लेख |
भाषा: | German |
प्रकाशित: |
1985
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विषय: | |
संबंधित चीजें : | In:
Kunstforum |
बोधानक: | ZS Kunst 4 1985 |
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